Saturday, 22 April 2017

क्या हमारी संवेदनाएं सिर्फ आतंकियों के लिए ही जागृत होती हैं...???

        पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव पर भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए जासूसी का आरोप लगाते हुए फांसी की सजा सुनाई है। आज एक भारतीय नागरिक के समर्थन में किसी भी "भाई" ने लगातार 14 ट्वीट नहीं किए। आज कोई पाकिस्तान के खिलाफ नहीं बोलेगा। आज सोशल साइट्स पर किसी प्रकार की गंभीर चर्चा नहीं होगी। क्योंकि किसी को पता ही नहीं है कि कुलभूषण है कौन..??

       वहीं किसी पाकिस्तानी आतंकवादी को भारत में सिर्फ आतंकवादी कह दिया जाता है तो बवाल खड़ा हो जाता है। सोशल साइट्स पर बहस छिड़ जाती है। न्यूज चैनल्स गंभीर पत्रकारिता की सोच व्यक्त की जाती हैं। लेकिन आज कुलभूषण के लिए कोई आवाज नहीं उठाएगा। 26 जुलाई 2016 को अभिनेता सलमान खान ने मुंबई बम ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन के बचाव में लगातार “14 ट्वीट” किए थे। ट्वीट कर कहा था कि “याकूब निर्दोष” है। इतना ही नहीं याकूब का बचाव करते हुए सलमान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से गुजारिश करते हुए कहा था कि शरीफ साहब एक दरख्वास्त है अगर टाइगर मेमन आपके मुल्क में है तो प्लीज उसे बता दीजिए। जिसके चलते एक निर्दोष को फांसी दी जा रही है। अब तो ये लगने लगा है कि कुलभूषण के लिए किसी “भाई” के दिल में कोई दयाभावना नहीं है। उन्हें तो लग रहा होगा, क्या फर्क पड़ता है कि पाकिस्तान में कुलभूषण को फांसी की सजा दी जाए। क्या फर्क पड़ता है कि वह रॉ का एजेंट है या नहीं। फर्क पड़े भी क्यों। कौन सा आज भारत में किसी आतंकवादी को फांसी दी जा रही है।
         अफसोस होता है कि कुलभूषण को बचाने या उसके समर्थन में कोई भाई नहीं उतरा। ऐसे क्यों...?? क्या वो अपना नहीं है। या हमें उससे हमदर्दी नहीं है। ...और कुलभूषण के समर्थन में कोई अभिनेता क्यों बोलेगा। उन्हें तो एक अच्छी फिल्म की कहानी जो मिल गई होगी। “भाई” की फिल्म रिलीज होने पर देश की सवा सौ करोड़ जनता खुशी-खुशी फिल्म देखने जाएगी, और कहेगी- भाई ने अच्छी एक्टिंग की है। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के निवासी रवींद्र कौशिक का नाम आपने शायद ही पहले सुना होगा। 2001 में पाकिस्तान की जेल में रवींद्र को दिल का दौरा पड़ा, और उनकी मौत हो गई। कौशिक के जीवन पर बनी भाई की फिल्म "एक था टाईगर" ने खूब वाहवाही लूटी थी। फिर एक “सरबजीत” औऱ अब “कुलभूषण जाधव”। कुछ अभिनेता तो ये बैठे सोच रहे होंगे कि फिल्म के लिए सच्ची घटना पर आधारित एक अच्छी कहानी मिलने वाली है। एक सहिष्णु देश जहां बात बात पर लोग अपने अवार्ड वापस करने लगते हैं और कहते हैं कि भारत में असहिष्णुता फैल रही है। सर्जिलक स्ट्राइक पर लोग सबूत मांगने लगते हैं। सरकार को दोषी ठहराने लगते हैं। भोपाल में सिमी आतंकियों के एनकाउंटर का मामला दिन भर चर्चाओं में रहता है। वहीं दूसरा दिन होते ही हम भूल जाते हैं, कि कल क्या हुआ था। भारत में हो रही घटनाओं को लेकर एक्टर ये तक बोल देते हैं कि उन्हें भारत में रहने से डर लगता है। हम पूछते हैं उनसे कि, वो सीरिया या अमेरिका क्यों नहीं चले जाते। जहां एक देश दूसरे देश पर रासायनिक हमला कर रहा है। हम तो फिर भी सुरक्षित हैं। खैर....

          एक ओर भारत में आतंकियों की बचाने के लिए सुबह 6 बजे सुप्रीम कोर्ट खुलता है। उनके लिए दया याचिका मांगी जाती है। भारत की जेलों में बंद आतंकवादियों को प्रतिदिन बिरयानी खिलाई जाती है। तब कोई ये नहीं कहता कि ये आतंकी है इसे तुरंत फांसी की सजा दी जाए। उल्टा वहां हम अपना (भारत) का बड़ा दिल कहने की बात करते हैं। बॉलीवुड के लिए तो खुशी की बात है। पहले रवींद्र कौशिक, फिर सरबजीत और अब कुलभूषण जाधव। अच्छी फिल्म बनेगी...!! देश की जनता खुशी खुशी सिनेमाघरों में जाएगी। कहानी की तारीफ होगी। स्टोरी अच्छी होने पर भारत सरकार फिल्म टैक्स फ्री कर देगी, और फिल्म नेशनल अवार्ड जीत जाएगी। फिर एक महीने बाद कोई बता भी नहीं पाएगा कि कुलभूषण कौन था...??? ...और वो नाम गुमनाम हो जाएगा.....!!

Sunday, 9 April 2017

क्या हम वाकई में खुश हैं, या खुश होने का दिखावा करते हैं....सोचने वाली बात है...???


         दिखावा... दिखावा और सिर्फ दिखावा... वर्तमान समय में लोगों ने दिखावे का चोला ओढ़ रखा है, खुशी उसके चेहरे पर झलकती तो है, लेकिन दिखाई नहीं देती है। सोचने वाली बात ये है, क्या वह वास्तव में खुश है। आप खुद अपने आप से पूछिए... दिनभर में कितनी परेशानियों का सामना करते हैं आप। कभी मां-बाप की सेहत की फिक्र तो कभी गर्लफ्रेंड से झगड़ा या फिर बच्चों की पढ़ाई की चिंता। फिर ऑफिस में बॉस की डांट-फटकार... फिर भी इंसान मुस्कराने का दिखावा करता रहता है। आज हर इंसान सिर्फ पैसे के पीछे भागता रहता है, पैसे को ही उसने खुशी मान लिया है। किसी के पास अच्छी बाइक हो या कार या किसी के बच्चों को अच्छा स्कूल जाता देख वो भी अपने परिवार के लिए ऐसे ही सपने संजोता है लेकिन इस प्रतियोगिता से भरी दुनिया में वह सुबह निकलता है और दिनभर की दौड़भाग के बाद जब कोई प्रतिफल नहीं निकलता और शाम को घर आता है तो फिर उसे अपने सपने बिखरते नजर आते है लेकिन अपने बच्चों के सामने उसे झूठी हंसी हंसनी ही पड़ती है। जाने कहां हमारी खुशी आज खो सी गई है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। इंसान का परिवार ही उसकी असली खुशी होती थी, दिनभर खेतों में काम के बाद जब वह घर आता था तो परिवार के साथ हंसी-ठिठौली, बच्चों का लाड़-प्यार, मां-बाप की सेवा में उसकी असली खुशी छिपी होती थी। आज तो सिर्फ दिखावा और चेहरे की झूठी हंसी को ही लोग खुशी समझ बैठते हैं। दुनिया बनने के बाद जबसे इंसान का विकास हुआ है, तब से वह दौड़ भाग में लगा है। अक्सर वह बनावटी चीजों के पीछे ही भागता आया है, और अभी भी मटीरियलस्टिक चीजों में ही अपनी खुशियां ढूंढ़ता है। जिसके चलते वह अपनी खुशियों के पैमानों को ही भूल गया है। इंसान ने जो काम करने की व्यवस्था बनाई है, उसने चीजों को और भी मुश्किल, और भी पेचीदा बना दिया है। पुरानी व्यवस्था के क्रम को अब वह धीरे-धीरे स्वीकार कर चुका है। उसका मानना है कि कुछ हासिल करने के बाद वो खुश हो जाएगा। लेकिन तब तक कुछ और आवश्यक जरूरते उसके सामने आ जाती हैं, और उसकी खुशियां धरी की धरी रह जाती हैं। इसी क्रम में कुछ भले लोगों को हैपीनेस इंडेक्स सूझा, लेकिन इसे जीडीपी और डेवलपमेंट के मुकाबले कम तरजीह मिलती है, और मिले भी क्यों न। जन्म लेने के बाद जब वह कुछ समझने योग्य होता है तबसे उसे यही सिखाया जाता है कि खुशी सिर्फ पैसे कमाने से मिलती है, एक अच्छी लाइफस्टाइल में रहने से वह खुश रह सकता है। फिर क्या, वह पैसे कमाने की होड़ में भागने लगता है।

          वैसे तो हिंदुस्तान अभी के समय में दुनिया में सबसे तेजी से विकसित होने वाला देश कहा जा रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि विकसित देश होने के बावजूद भी हम खुश नहीं हैं। हम खुश नहीं क्योंकि, हम अपनी खुशियां ब्रांडेड वस्तुओं में ढूंढ़ते हैं, फाइव स्टार होटल में खाना खाने में हम अपनी खुशिय़ां ढूंढ़ते हैं। लग्जरी कार से घूमने में हम अपनी खुशियां खोजते हैं। इतना ही नहीं चंद कागज के टुकड़े खर्च करने पर हमें लगता है कि हम खुश हैं। असल मायने में क्या है, खुशी कब मिलती है ये हमें पता ही नहीं है। और हम अपने खुश होने का दावा करते हैं।

         वर्ल्ड हैप्पिनेस 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक खुशी के मामले में पाकिस्तानी हम भारतीयों से कहीं आगे हैं। जी हां, संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड हैप्पिनेस रिपोर्ट 2017 कुछ यही कहती है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नार्वे दुनिया का सबसे खुश देश है। इसने तीन पायदान की छलांग लगाई है। पिछले साल नार्वे खुशहाल देशों की सूची में चौथे स्थान पर था। वहीं, डेनमार्क पहले स्थान पर था। इस सूची में 155 देशों को रखा गया है। इसमें चीन 79वें, पाकिस्तान 80वें और भारत 122वें नंबर पर है, जबकि पिछले वर्ष 118वें नंबर पर था। विकसित देश के दावा करना वाला देश खुशी के मायने में एक साल के भीतर 4 कदम पीछे हो गया है। सबसे ताज्जुब की बात तो यह है कि हमारे पड़ोसी देश जहां आए दिन हमले होते हैं। आए दिन दंगे फसाद की खबरें आती हैं। वो भी हमसे आगे हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक आतंकवाद के पनाहगाह पाकिस्तान और बेहद गरीब देश नेपाल जैसे देश भी खुशहाली के मामले में भारत से आगे हैं। दुनिया के देशों की खुशहाली का पता लगाने के लिए पैसों के साथ-साथ उस देश के लोगों की आय, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, उदारता, सामाजिक स्तर और भ्रष्टाचार के स्तर को आधार बनाया गया।

       खुशहाल देश वो हैं जहां खुशहाली, सोसायटी में आपसी भरोसा, लोगों के बीच बराबरी और सरकार पर भरोसा ज्यादा है और इन सभी के बीच अच्छा बैलेंस है। इस सालाना रिपोर्ट का मकसद सरकारों और सिविल सोसायटी को खुशहाली के बेहतर तरीके बताना हैं। देशों के हैप्पीनेस इंडेक्स को वहां प्रति व्यक्ति जीडीपी, अच्छी लाइफ एक्सपेंटेंसी, फ्रीडम, सोशल सपोर्ट, उदारता और सरकार या बिजनेस में जीरो करप्शन के पैमाने पर आंका गया है। जबकि भारत में खुशी की कोई बात ही नहीं करता है।

इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल से अब तक चार पायदान नीचे खिसकने के बाद भी भारत सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। इसके बाद भी हम खुशी नहीं बल्कि विकास की ओर अग्रसर हैं, सिर्फ विकास की ही बातें करते हैं। घर परिवार में भी तरक्की की बात होती है। विकास की बात होती है। खुश कैसे रहा जाए,  खुशी कैसे मिलेगी इस बारे में कोई बात ही नहीं करना चाहता है। यदि यही हाल रहा तो आने वाले वर्ष में हम और नीचे खिसक सकते हैं। जोकि एक गंभीर चर्चा का विषय बन सकता है।

हैप्पिनेस रिपोर्ट 2017 की लिस्ट मे शामिल प्रमुख देश
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1 नॉर्वे
2 डेनमार्क
3 आईसलैंड
4 स्विट्जरलैंड
5 फिनलैंड
6 नीदरलैंड
7 कैनेडा
8 न्यूजीलैंड
9 ऑस्ट्रेलिया
10 स्वीडन
79 चीन
80 पाकिस्तान
97 भूटान
99 नेपाल
110 बांग्लादेश
120 श्रीलंका
122 भारत

Monday, 6 February 2017

‘तेरी यादें’

अब तुझसे बात इसलिए भी नहीं हो पाती है,
क्योंकि मैने अब पैदल चलना छोड़ दिया है...!!

--एक समय था जब मैं कॉलेज पैदल जाना पसंद करता था। वो भी सिर्फ इसलिए कि तुमसे बात कर सकूं। तुमसे बात करते हुए वो सात किलोमीटर कब गुजर जाते थे पता ही नहीं चलता था। प्रतिदिन सुबह जल्दी होने का इंतजार करता था कि कब सुबह हो और तुमसे बात हो। वो सात किलोमीटर तक पैदल चलकर तुमसे बात करना मुझे आज भी याद है। उन तीन सालों का वो हर किस्सा जो तुमसे जुड़ा है मुझे आज भी याद है। बीयर पीकर तुम्हें प्रपोस करना, तुमसे लड़ाई झगड़े, तुम्हारा वो प्यार से ‘आहा’ बोलना, जिसे मैं तुमसे सुनने के लिए बेताब रहता था। बता दूं कि दिल के कोने में आज भी तुम बसती हो। फर्क सिर्फ इतना है कि अब जता नहीं पाता हूं। क्योंकि अब तुम मेरे पास नहीं हो। उम्मीद है  कि आज भी तुम्हें हिचकी आने पर मेरी याद आती होगी। कि मैने तुम्हें याद किया है। फोन के तार न सही लेकिन दिल के तार आज भी तुमसे जुड़े हैं।

‘एहसास’

वो तुम्हारा एक साइड पैर करके पीछे बाइक पर बैठना और थोड़ी देर में ही दोनों तरफ के लिए कहना जोकि हम भी चाहते थे, पीठ पर थपकी देना, नजदीक आने की शुरुआत करना, नजर मिलाने की हिम्मत देना, हाथ हिला कर बाय करना....सब कुछ अभी भी यादें ही हैं...!!
नोट : इसका वास्तविक्ता से कोई लेना देना नहीं है

‘खुला प्रेम पत्र’

मेरा खुला प्रेम पत्र तुम्हारे नाम--
प्रिय,

             जान, जानू, बाबू, बेटू, बेबी....जो तुम्हें अच्छा लगे वो समझ लेना...
          पता है क्या, जब तक मैं तुमसे नहीं मिला था तब तक लगता था पता नहीं वो कैसी होगी। फिर दिल को तसल्ली दिलाने के लिए खुद से बोलता कि वो जैसी सी होगी बस अच्छी सी होगी। पिछले डेढ़ साल जो तुमसे लड़ते झगड़ते निकाले वो जिंदगी के काफी अनुभवी और सबसे बेहतरीन झगड़े रहे हैं। कभी - कभी उन झगड़ों के बारे में सोचता तो मुझे ही लगता, कि कहीं मैंने ही ज्यादा बोल दिया है। ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है तुम भी कम नहीं हो। कुछ गलतियां तुम्हारी भी रहीं हैं। जैसे कि......तुम समझदार हो समझ सकती हो। वैसे आज खुश तो बहुत होगी तुम, क्योंकि जो तुम पिछले डेढ़ साल से सुनना चाहती थीं वो आज तुमने सुन ही लिया। पता नहीं क्यों तुमसे मिलकर जाने के बाद रहा ही नहीं गया। बिलकुल एकांत में बैठने के बाद भी दिल को सुकून ही नहीं मिला। सोचा आज तुमसे कह ही दूं। मेरा दिल भी हलका हो जाएगा। जैसे तैसे घबराते हुए कहा तब जाकर अच्छा महसूस कर रहा हूं। सपनों की दुनिया भी अजीब है यार। आप कब, क्या देख लें पता ही नहीं चलता है। खैर, ये बात तो थी सपनों की...।
तुम्हें पता है क्या एक लाइन जो मुझे अभी भी हसी दिला रही है। और वो ये है ‘यार ये जगह सही नहीं है’। शायद ये पढ़ने के बाद तुम्हें भी हसी आ ही जाएगी। एक बात और मैं किसी की ‘काउंसिलिंग’ नहीं करता। वो तो लोग मिलते हैं और बाते अपने आप निकलने लगती हैं। अब मेरी बातें तुम्हें ‘काउंसिलिंग’ लगने लगे तो बताओ मैं क्या कर सकता हूं। अंत में एक बात और ‘हां ये सच है कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं’ बस कभी बोलने की जरूरत नहीं समझी। और हां, मुझसे इसका जवाब नहीं चाहिए। क्योंकि मैं जानता हूं कि प्यार, मोहब्बत के लिए नहीं बना हूं। खैर कोई बात नही। अपना ख़याल रखा करो। हमेशा खुश रहो दिल से दुआ है ।



                                                                                                                                              तुम्हारा 'अंकित'