पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव पर भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए जासूसी का आरोप लगाते हुए फांसी की सजा सुनाई है। आज एक भारतीय नागरिक के समर्थन में किसी भी "भाई" ने लगातार 14 ट्वीट नहीं किए। आज कोई पाकिस्तान के खिलाफ नहीं बोलेगा। आज सोशल साइट्स पर किसी प्रकार की गंभीर चर्चा नहीं होगी। क्योंकि किसी को पता ही नहीं है कि कुलभूषण है कौन..??
वहीं किसी पाकिस्तानी आतंकवादी को भारत में सिर्फ आतंकवादी कह दिया जाता है तो बवाल खड़ा हो जाता है। सोशल साइट्स पर बहस छिड़ जाती है। न्यूज चैनल्स गंभीर पत्रकारिता की सोच व्यक्त की जाती हैं। लेकिन आज कुलभूषण के लिए कोई आवाज नहीं उठाएगा। 26 जुलाई 2016 को अभिनेता सलमान खान ने मुंबई बम ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन के बचाव में लगातार “14 ट्वीट” किए थे। ट्वीट कर कहा था कि “याकूब निर्दोष” है। इतना ही नहीं याकूब का बचाव करते हुए सलमान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से गुजारिश करते हुए कहा था कि शरीफ साहब एक दरख्वास्त है अगर टाइगर मेमन आपके मुल्क में है तो प्लीज उसे बता दीजिए। जिसके चलते एक निर्दोष को फांसी दी जा रही है। अब तो ये लगने लगा है कि कुलभूषण के लिए किसी “भाई” के दिल में कोई दयाभावना नहीं है। उन्हें तो लग रहा होगा, क्या फर्क पड़ता है कि पाकिस्तान में कुलभूषण को फांसी की सजा दी जाए। क्या फर्क पड़ता है कि वह रॉ का एजेंट है या नहीं। फर्क पड़े भी क्यों। कौन सा आज भारत में किसी आतंकवादी को फांसी दी जा रही है।
अफसोस होता है कि कुलभूषण को बचाने या उसके समर्थन में कोई भाई नहीं उतरा। ऐसे क्यों...?? क्या वो अपना नहीं है। या हमें उससे हमदर्दी नहीं है। ...और कुलभूषण के समर्थन में कोई अभिनेता क्यों बोलेगा। उन्हें तो एक अच्छी फिल्म की कहानी जो मिल गई होगी। “भाई” की फिल्म रिलीज होने पर देश की सवा सौ करोड़ जनता खुशी-खुशी फिल्म देखने जाएगी, और कहेगी- भाई ने अच्छी एक्टिंग की है। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के निवासी रवींद्र कौशिक का नाम आपने शायद ही पहले सुना होगा। 2001 में पाकिस्तान की जेल में रवींद्र को दिल का दौरा पड़ा, और उनकी मौत हो गई। कौशिक के जीवन पर बनी भाई की फिल्म "एक था टाईगर" ने खूब वाहवाही लूटी थी। फिर एक “सरबजीत” औऱ अब “कुलभूषण जाधव”। कुछ अभिनेता तो ये बैठे सोच रहे होंगे कि फिल्म के लिए सच्ची घटना पर आधारित एक अच्छी कहानी मिलने वाली है। एक सहिष्णु देश जहां बात बात पर लोग अपने अवार्ड वापस करने लगते हैं और कहते हैं कि भारत में असहिष्णुता फैल रही है। सर्जिलक स्ट्राइक पर लोग सबूत मांगने लगते हैं। सरकार को दोषी ठहराने लगते हैं। भोपाल में सिमी आतंकियों के एनकाउंटर का मामला दिन भर चर्चाओं में रहता है। वहीं दूसरा दिन होते ही हम भूल जाते हैं, कि कल क्या हुआ था। भारत में हो रही घटनाओं को लेकर एक्टर ये तक बोल देते हैं कि उन्हें भारत में रहने से डर लगता है। हम पूछते हैं उनसे कि, वो सीरिया या अमेरिका क्यों नहीं चले जाते। जहां एक देश दूसरे देश पर रासायनिक हमला कर रहा है। हम तो फिर भी सुरक्षित हैं। खैर....




